Himachal Pradesh
13th Legislative Assembly ( Vidhan Sabha )
  • डॉ0 बिन्दल ने दी प्रदेशवासियों को संविधान दिवस की बधाई।

    26/11/2019

    हिमाचल प्रदेश विधान सभा के माननीय अध्यक्ष डॉ0 राजीव बिन्दल ने प्रदेश व देशवासियों को 70वें संविधान दिवस की हार्दिक बधाई व शुभकामनायें दी है। अपने बधाई संदेश में डॉ0 बिन्दल ने कहा कि संविधान हमें किसी भी विदेशी और आंतरिक शक्ति के नियन्त्रण से पूर्णत: मुक्त सम्प्रभुतासम्पन्न राष्ट्र घोषित करता है। यह सीधे लोगो द्वारा चुने गए एक मुक्त सरकार द्वारा शासित है तथा यही सरकार कानून बनाकर लोगों पर शासन करती है। डॉ0 बिन्दल ने कहा कि भारत संविधान भारत का सर्वोच्च विधान है जो संविधान सभा द्वारा 26 नवम्बर, 1949 को पारित हुआ तथा 26 जनवरी, 1950 से प्रभावी हुआ। यह दिन 26 नवम्बर भारत के संविधान दिवस के रूप में घोषित किया गया है जबकि 26 जनवरी का दिन भारत में गणतन्त्र दिवस के रूप में मनाया जाता है। भारत का संविधान विश्व के किसी भी गणतांत्रिक देश का सबसे लम्बा लिखित संविधान है।

    उन्होंने कहा कि द्वितीय विश्वयुद्ध की समाप्ति के बाद जुलाई 1945 में ब्रिटेन ने भारत संबन्धी अपनी नई नीति की घोषणा की तथा भारत की संविधान सभा के निर्माण के लिए एक कैबिनेट मिशन भारत भेजा जिसमें 3 मंत्री थे। 15 अगस्त 1947 को भारत के आज़ाद हो जाने के बाद संविधान सभा की घोषणा हुई और इसने अपना कार्य 9 दिसम्बर 1947 से आरम्भ कर दिया। संविधान सभा के सदस्य भारत के राज्यों की सभाओं के निर्वाचित सदस्यों के द्वारा चुने गए थे। पं0 जवाहरलाल नेहरू, डॉ भीमराव अम्बेडकर, डॉ राजेन्द्र प्रसाद, सरदार वल्लभ भाई पटेल, मौलाना अबुल कलाम आजाद आदि इस सभा के प्रमुख सदस्य थे। इस संविधान सभा ने 2 वर्ष, 11 माह, 18 दिन में कुल 114 दिन बहस की। संविधान सभा में कुल 12 अधिवेशन किए तथा अंतिम दिन 284 सदस्यों ने इस पर हस्ताक्षर किया और संविधान बनने में 166 दिन बैठक की गई इसकी बैठकों में प्रेस और जनता को भाग लेने की स्वतन्त्रता थी। भारत के संविधान के निर्माण में संविधान सभा के सभी 389 सदस्यो ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई,26 नवम्बर 1949 को सविधान सभा ने पारित कियाऔर इसे 26 जनवरी 1950 को लागू किया गया था।

    भारतीय संविधान की अनुसूचियाँ भारत के संविधान में वर्तमान में आज भी केवल 395 अनुच्छेद ही है। एवं केवल इन अनुच्छेदों का विस्तार ही किया गया है। एवं संविधान में वर्णित 395 अनुच्छेदों के अतिरिक्त एक भी नवीन अनुच्छेद नही है।। वर्तमान में भारतीय संविधान में 12 अनुसूची और 22 भाग है भारत के मूल संविधान में आठ अनुसूचियाँ थी परन्तु वर्तमान में भारतीय संविधान में बारह अनुसूचियाँ है।

    संविधान में नौवी अनुसूची प्रथम संविधान संशोधन 1951, 10वीं अनुसूची 52वें संविधान संशोधन 1985, 11वीं अनुसूची 73वें संविधान संशोधन1992 एवं बाहरवीं अनुसूची 74वें संविधान संशोधन 1992 द्वारा सम्मिलित किया गया।

    भारतीय संविधान में वर्तमान समय में भी केवल 466 अनुच्छेद, तथा 12 अनुसूचियां हैं और ये 24 भागों में विभाजित है। परन्तु इसके निर्माण के समय मूल संविधान में 395 अनुच्छेद जो 22 भागों में विभाजित थे इसमें केवल 8 अनुसूचियां थीं। संविधान में सरकार के संसदीय स्‍वरूप की व्‍यवस्‍था की गई है जिसकी संरचना कुछ अपवादों के अतिरिक्त संघीय है। केन्‍द्रीय कार्यपालिका का सांविधानिक प्रमुख राष्‍ट्रपति है। भारत के संविधान की धारा 79 के अनुसार, केन्‍द्रीय संसद की परिषद् में राष्‍ट्रपति तथा दो सदन है जिन्‍हें राज्‍यों की परिषद राज्‍यसभा तथा लोगों का सदन लोकसभा के नाम से जाना जाता है। संविधान की धारा 74 (1) में यह व्‍यवस्‍था की गई है कि राष्‍ट्रपति की सहायता करने तथा उसे सलाह देने के लिए एक रूप होगा जिसका प्रमुख प्रधानमंत्री होगा, राष्‍ट्रपति इस मंत्रिपरिषद की सलाह के अनुसार अपने कार्यों का निष्‍पादन करेगा। इस प्रकार वास्‍तविक कार्यकारी शक्ति मंत्रिपरिषद में निहित है जिसका प्रमुख प्रधानमंत्री है जो वर्तमान में नरेन्द्र मोदी हैं।

    उन्होंने कहा कि मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से लोगों के सदन ( लोक सभा ) के प्रति उत्तरदायी है। प्रत्येक राज्य में एक विधान सभा है। उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, कर्नाटक,आंध्रप्रदेश और तेलंगाना में एक ऊपरी सदन है जिसे विधानपरिषद कहा जाता है। राज्‍यपाल राज्‍य का प्रमुख है। प्रत्‍येक राज्‍य का एक राज्‍यपाल होगा तथा राज्‍य की कार्यकारी शक्ति उसमें निहित होगी। मंत्रिपरिषद, जिसका प्रमुख मुख्‍यमंत्री है, राज्‍यपाल को उसके कार्यकारी कार्यों के निष्‍पादन में सलाह देती है। राज्‍य की मंत्रिपरिषद से राज्‍य की विधान सभा के प्रति उत्तरदायी है।

    डॉ0 बिन्दल ने कहा कि हम सभी को संविधान का सम्मान करना चाहिए तथा संविधान जहां हमें अपने मौलिक अधिकारों के बारे सचेत करवाता है वहीं हमें अपने मौलिक कर्तव्यों के बारे भी जागरूक करवाता है। यह संविधान दिवस स्वतन्त्र भारत की सच्ची भावना का प्रतीक है और यह हमेशा इस बात के लिए प्रेरित करता है कि हम सभी अपने राष्ट्र और इसके संविधान का सम्मान करेंगे। उन्होंने आशा व्यक्त की है कि आने वाली पीढियां इसका सम्मान व अनुसरण करेंगी तथा संघीय व्यवस्था को मजबूत करने में अपना बहुमूल्य योगदान देगी।

    संविधान ने हमे अनेकानेक प्रकार के अधिकार दिए और अनेक प्रकार से हमारे दायित्व भी बताए। परन्तु हम देशवासी अधिकारों के प्रति पूरी तरह सजग एवं जागरूक हो गए और अधिकारों की प्राप्ति के लिए संघर्ष लगातार जारी है। परन्तु संविधान ने जो हमारे दायित्व बताए उनके बारे में हमारी सजगता, जागरूकता गौण हो गई। हमारे देश के प्रति क्या दायित्व है, हमारे प्रदेश के प्रति क्या दायित्व है, हमारे समाज के प्रति क्या दायित्व है, हमारे परिवार के प्रति, महिलाओं के प्रति, वुर्जुगों के प्रति, निर्धन एवं अशिक्षित के प्रति क्या दायित्व है, अब समय आ गया है कि सम्पूर्ण समाज अपने दायित्वों के प्रति सजग हो कर कार्य करें। हमें दुनिया का श्रेष्ठ राष्ट्र बनना है तो हमे अपने दायित्वों का निर्वाहन करने का संकल्प लेना चाहिए।

    (हरदयाल भारद्वाज),
    उप-निदेशक,
    लोक संपर्क एवं प्रोटोकॉल,
    हि0प्र0 विधान सभा ।